कोरोनील दवाई लॉन्च करने की सच्चाई

 

 

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय पतंजलि आयुर्वेदिक मंत्रालय लिमिटेड की ओर से कोरोनावायरस की दवा खोज लेने के दावों को लेकर संज्ञान लिया है और साफ तौर पर कहा है कि पतंजलि की लैब विवरण की जानकारी नहीं है मगर पतंजलि के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण ने इसे कम्युनिकेशन गैप बताते हुए यह दावा किया है कि उनकी कंपनियों ने आयुष मंत्रालय को सारी जानकारी दे दी है बाल कृष्णा ने अपने ट्वीट में लिखा है कि यह सरकार आयुर्वेद को प्रोत्साहन और बढ़ाओ गौरव देने वाली है क्लिनिकल ट्रायल के लिए जितने भी पैमाना करें उसे 100% पूरा घर गए हैं । पतंजलि ग्रुप ने शुभ मंगलवार कोरोनावायरस की टेबलेट लांच की है। जिनके बारे में कंपनी ने दावा किया है कि यह कोरोनावायरस से होने वाली बीमारी का आयुर्वेदिक इलाज कर सकती है।
पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव ने दावा किया है कि कोरोना की दवा कि इसको दो स्तर के बाद तैयार किया गया । पहले केमिकल कंट्रोल स्टडी की गई थी फिर इसको क्लिनिकल ट्रायल भी किया गया ।


20 घंटे बाद आयुष मंत्रालय में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड से कहा की वह जल्द से जल्द उस दवा का नाम तथा उसका तरीका बताएं जिसकी वजह से कोरोनावायरस से हुई बीमारी को ठीक किया जा सके, साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा है कि पतंजलि संस्थान नमूने का आकार स्थान अस्पताल जहां अध्ययन किया गया उसके मंजूरी के बारे में विस्तृत जानकारी दें ।
मंत्रालय के बयान के मुताबिक पतंजलि को इस बारे में सूचित किया गया है कि दवा के इस तरह के विज्ञापन पर रोक है इस तरह के विज्ञापन ड्रग एक्ट कानून 1954 के तहत आते हैं कोरोला महामारी को लेकर सरकार द्वारा जो भी निर्देश जारी किए गए हैं उन्होंने जी भी इस जानकारी पर सॉफ्टवेयर पर कहां है यह आयुर्वेदिक दवाओं के विज्ञापन पर भी लागू होता है मंत्रालय ने 21 अप्रैल 2020 को यह सूचना जारी किया की जिसमें बताया गया था की आयुष मंत्रालय की देखरेख में कोरोला को लेकर शोध अध्ययन कैसे किया जाएगा ।

इन सभी की जांच नहीं हो जाती तब तक इस दवाओं के बारे में विज्ञापनों पर तथा वितरण और उपयोग करने पर रोक लगा दी गई है । इसके साथ ही मंत्रालय ने उत्तराखंड सरकार की लाइसेंसी अधिकरण के लाइसेंस की कॉपी मांगी है और प्रोडक्ट के मंजूर किए जाने का ब्यौरा भी मांगा है ।
भारत में कोविड-19 क्रिकेट के के केस तथा इसके उपचार की रणनीति बनाने के लिए जिम्मेदार भारतीय आयुर्वेदिक अनुसंधान को इस दवा की कोई जानकारी नहीं है । इस संस्थान के अनुसार पतंजलि द्वारा विकसित इन दवाओं के बारे में टिप्पणी करने से इंकार कर दिया ।
आयुर्वेद की इस दवा को कोरोनावायरस के मरीजों के इलाज में कारगर होगा इसके जवाब में उन्होंने कहा कि मैं ऐसी किसी दवाओं पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा और इस तरह संबंधित किसी भी सहयोग में मैं शामिल नहीं रहा । भारत सरकार के केंद्र औषध मानक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया की सामान्य परिस्थितियों में इस दवा को विकसित करेंगे और उसकी क्लिनिकल ट्रायल पूरा होने और उसकी मार्केटिंग शुरू करने में कम से कम 3 साल का समय लगता है असामान्य परिस्थितियों में इसकी गति बढ़ाई जा सकती है फिर भी एक नई दवा को बाजार में आने में 10 महीने से 1 साल का वक्त रखते हैं लेकिन पतंजलि ने कुछ हफ्तों में कोरोनील नाम की दवा का निर्माण करके प्रचार किया है ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *